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पेरिस समझौते पर पुनर्विचार करने की कोई गुंजाइश नही।

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कोटिविस: भारत ने पोलैंड में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के मंत्री स्तरीय सैन्य में कहा कि पेरिस समझौते में पुनर्विचार की गुंजाइश नहीं है इसलिए विकसित और विकासशील देशों के बीच बने नाजुक संतुलन को बरकरार रखना चाहिए। हमें गरीब वंचित और कमजोर वर्गों के साथ खड़ा होना चाहिए जो जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे यह समय साझा बराबरी और जलवायु न्याय के सिद्धांतों पर ही तलाश है और एक दूसरे का समर्थन करने का है ताकि कोई भी पीछे ना रह जाए।
गरीब और अविकसित देशों की मदत करने और कमज़ोर श्रेणी के लोगों के साथ प्रेम का भाव रखने इच्छा जताई है और और विकाश देशों के साथ बने अच्छे व्यव्हार और नाज़ुक रिश्तों का सन्तुलन बनाये रखना अति आवश्यक है। जिससे दोनों देशों के बीच बने रिश्ते और भी मज़बूत होंगें। समय- समय पर देश की उन्नति की और व्यवस्था को अधिक अच्छे और बड़े स्तर पर ले जाने के लिए विकासशील देशों से मदत की उम्मीद लगाई जा सकती है।
जिससे गरीबों और जरूरतमन्द लोगो को सहायता मिलेगी।

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