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Bs3 और bs4 वाहनों में क्या अंतर होता है,आइये जानते हैं।

नमस्कार दोस्तों आप लोगों ने bs3 व bs4 इंजन के वाहनों के बारे में सुना ही होगा आज मैं आपको संछिप्त रूप से इन दोनों प्रकार के वाहनों में अंतर को समझाता हूँ।
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bs3 एवं bs4 का अर्थ भारत स्टेज3 व भारत स्टेज4 के लिए उपयुक्त होता है, bs3 व bs4 वाहनों के इंजिन की दक्षता और तकनीक के अनुसार उनकी कार्यकुशलता में आने वाली बढ़ोत्तरी का एक मानक है जोकि वायु में प्रसारित प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए निर्धारित किया गया है।

भारत सरकार के नियमानुसार bs3 वाहन पूरे भारत में चलाया जा सकता है जबकि सभी मेट्रो शहरों में bs4 वाहनो को चलाने में पर ही ज़ोर दिया जाता है,सभी वाहन निर्माता वर्तमान समय में bs4 वाहन को ही निर्मित कर रहे हैं हालांकि जो 2016 या उससे पूर्व के वाहन थे वह bs3 तकनीक पर ही आधारित थे।
1 अप्रैल 2010 में भारत सरकार ने bs3 वाहनों को भारत मे चलाने की अनुमति प्रदान की थी,परन्तु वर्ष 2017 में वातावरण में प्रदूषण के बढ़ जाने से bs3 इंजिन वाले वाहनों पर कड़ा प्रतिबन्ध लगा दिया गया
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क्या है दोनों इंजिनों के बीच अंतर:-

दोनों ही प्रकार के इंजिनों में उनके अंदर की क्रियाविधि में अंतर होता है,
Bs के आगे लगा हुआ अंक इस ओर इंगित करता है कि वाहन कितना प्रदूषण कर रहा है bs4 वाहन bs3 वाहनों की अपेक्षा कम प्रदूषण करते हैं।


दोनों ही इंजिनों में मुख्य अंतर ये है कि इनसे निकलने वाले प्रदूषण पदार्थों जैसे कार्बन डाई ऑक्साइड,नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड तथा विभिन्न हाइड्रोकार्बन की मात्रा निर्धारित की जाती है bs4 में इन पदार्थों की कम मात्रा उत्सर्जित होती है जबकि bs3 में ये अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में उत्सर्जित होती थी,परन्तु दोनों प्रकार के इंजन के वाहनों के milege में कोई अंतर नही होता।
सरकार का नियम आने के पश्चात विभिन्न वाहन निर्माता कंपनी के लिए पुराने स्टॉक (bs3) को निकालना एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो गयी थी,
जिस कारण उनको पूरा स्टॉक काफी कम दामों में ही बेचना पड़ा,
सरकार का नियम आने के पश्चात भी गौरतलब है कि कुछ पुराने bs3 वाहन आज भी चलायमान हैं परंतु अब कोई भी निर्माता नए bs3 वाहन नही बनाती।

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