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बढ़ा वीएफएक्स का का दौर हुआ बोलबाला।

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वीएफएक्स अगर कहानी को सुंदर बनाता है, तो उसके बेसिर- पैर का होना का खतरा भी पैदा करता है। निर्माता निर्देशक आनंद एल. राय फिल्म जीरो में इस तकनीक की मदद से शाहरुख खान को बौना बनाकर पर्दे पर ला रहे हैं कैसे देखते हैं वह इस तकनीक को उन्होंने बताया-

वीएफएक्स यानि विसुअल इफेक्ट्स, बॉलीवुड का नया ट्रेंड है। बाहुबली सीरीज की दोनों फिल्में संभव ही नहीं हो पाती अगर बीएफ एक्स ना होता। दृश्यों को खूबसूरत चमकदार और जादुई बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले यह इफैक्ट्स पिछले दिनों ठग्स ऑफ हिंदुस्तान और 2.0 में देखे गए। ठग्स से भले ही कथानक के स्तर पर उम्मीदों पर खरा नहीं उतरी। परंतु इसके दृश्यों की भावना से किसी ने इनकार नहीं किया। इसी तरह रजनीकांत और अक्षय कुमार स्टारर 2.0 में हवा में उड़ते मोबाइल फोन और रोबोट 2 को एक बगैर कई दृश्य नहीं रचा गया। हर एक फिल्म को स्पेशल इस इफेक्ट्स से सजाया गया। 500 करोड़ रुपए की इस फिल्म में 100 करोड़ तक वीएफएक्स पर खर्च किए गए हैं। वीएफएक्स के बढ़ते महत्व को भी समझा जा सकता है कि आज फिल्मों में भी सीधी बजट ऐसे दृश्यों के लिए रखा जाता है जो कंप्यूटर पर के रचैया सजाए चमकाए जाते हैं। सुशांत राजपूत सारा अली खान स्टारर निर्देशक अभिषेक कपूर की भीषण बाढ़ के दृश्य को इसी तरह रचा गया। वहीं अगले हफ्ते आने वाली शाहरुख खान जीरो में बौने के रूप में हीरो को दिखाया जा रहा है। जिसमें शाहरुख खान नजर आएंगे वहां भी वीएफएक्स का इस्तेमाल हुआ है। जनवरी 2019 में रिलीज होने वाली रानी लक्ष्मीबाई की बायोपिक क्वीन ऑफ झांसी में युद्ध के तमाम देशों को खूबसूरत बनाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। भले ही खूबसूरत हो परंतु कहीं-कहीं से कहानी से ज्यादा तवज्जो दी जाने लगी है ऐसे ऑफ हिंदुस्तान जैसे नतीजे का खतरा भी सामने दिख रहा है।

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